सूरज छुप गया बादलों के टुकड़े में शहर की छतों पसर गयी एक सावंली सी मंद रोशनी दुख बीत जाता है बीते नहीं तो मुश्किल होगा जीना पूरा नहीं होता है सुख कभी हो जाए तो आरजुएं अपना रोना रोने लगती हैं
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