तलाशती है एक नई धुन साज़ पर ज़िन्दगी की कभी तूलिका उठा के आकार देती है बिखरे रंगों को जीवन के और कभी रचती है शब्दों से इंद्रधनुषी स्वप्न खुद को मामूली समझने वाली लड़की
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