20150310

इक मक़ा

इक मक़ा को घर बनाते हैं
रिश्ते
वक्त के साथ घर की दीवारों पे
कुछेक दरारें पड़ जाती हैं
पपड़ी पड़ने लगती है
दरारें बातों की
पपड़ी गलतफहमी की

रंग ओ रोगन कराते हैं
पर दरारें
क्या करें कमबख्त
दिखती ही हैं
और
वक्त के साथ अजनबी हो जाते हैं
घर मक़ा बन जाते हैं

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