मना है कुछ सोचना!!! स्वप्निल आँखों में स्वप्न संजोना!!!
उठो, विगत को त्याग नव विहान की करो तैयारी
यही है जीवन
यही है सार जीवन का
छूटता जाता है बीता कल और जुड़ते हैं नव पृष्ठ
लेखनी इंतज़ार कर रही है तुम्हारा
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