बोये जाते हैं बेटे
उग जाती हैं बेटियां
मिलता है खाद पानी बेटों को
पर लहलहाती हैं बेटियां
ठेलना पड़ता है शिखर तक बेटों को
और जय का परचम लहराती हैं बेटियां
आँखों में देते हैं अश्क बेटे जब भी
उन अश्कों को पोंछती हैं बेटियां
जब भी अम्मा बापू को मिला दर्द
रोया करती हैं हमारी ही बेटियां
गिराते हैं जब भी बेटे
बढ़ कर आगे संभाल लेती हैं बेटियां
घाव दिया बेटों ने जब भी
मरहम बन जाती हैं बेटियां
क्या कहूँ शब्द नही मिलते मन
बस इतना ही पाया हमने
बेटों से अच्छी हैं बेटियां
20131118
बेटियां
कोई भी नही
सभी देखेंगे
तेरी गलतियों को
कोई भी नहीं
जो देखेगा तेरी आंख के आंसू
कोई भी नहीं
जो पढ़ेगा तेरी उदासी को
कोई भी नही
जो समझेगा तेरे दर्द को
येही है दुनिया
तेरे अपने
जीना होगा इनके ही बीच
जीना ही होगा तुझको
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