बेच डाला जिसने खुद को
खातिर तुम्हारे दूध के
इक औरत थी वो
बिन ब्याहे जो माँ बनी
एक ही,बस एक गलती की थी उसने
20141220
बस एक गलती
छोड़ो भी अब
छोड़ो भी अब जाने दो
इसका क्या सोग मनाना
क़े दुनिया इतनी काली है
बनो खुद आइना खुद का
आसमा तुम्हारी खातिर अब भी खाली है
उठ मेरी जान
उठ मेरी जान कि संभलना है तुझे
खुद ही खुद का खुदा बनना है तुझे
है रात ये स्याह गर
न ताक किसी और की जानिब
अपनी तकदीर को खुद से ही लिखना है तुझे
जब
खोने की खातिर कुछ है ही नही
कुछ पाने की हसरत भी नही
जीने की खातिर अब जिंदगी भी बची नही
चन्द लम्हे जो हैं झोली में उन्ही में जीना होगा
इस अधूरेपन का गरल अब तो पीना ही होगा
जब हकीकत मेरी जानेगी दुनिया सारी
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