20160303

वो आदमी

वो आदमी
अपनी ज़िन्दगी से निराश नहीं
जो किनारे लगे कूड़े के ढेर में
तलाशता है कुछ
फिर सड़क पे चलते लोगों को निहारता
और फिर अपने काम पर टिक लेता है
खुद को
शायद यही सोचता है
कि
ये सब मेरी खातिर नहीं
या फिर कुछ और
अचानक दौड़ के पास के कचरे से कुछ उठाता है
यूँ
जैसे पा लिया हो उसने प्रसाद ईश का

वो कचरा बीनने वाला आदमी