20140217

फिर इक बार

फिर इक बार
सुलग उठी
बुझी राख
फिर पुकारने लगी
वो राहें
बड़ी मुश्किल से
भुलाया था जिसको
बड़ी कोशिशों से
सुलाया था जिसको
फिर से बुलाने लगी हैं
जाग उठी हैं
असमंजस में हूँ
क्या करू
कल रात से