फिर इक बार सुलग उठी बुझी राख फिर पुकारने लगी वो राहें बड़ी मुश्किल से भुलाया था जिसको बड़ी कोशिशों से सुलाया था जिसको फिर से बुलाने लगी हैं जाग उठी हैं असमंजस में हूँ क्या करू कल रात से