माँ
तू बहुत याद आती है
तेरी हाथों ने दी थी जो थपकियाँ
आज तक उस छुअन की महक ताज़ी है
माँ,तू बहुत याद आती है
तूने ही सिखाया मुझको चलना
गिरना और गिर के सम्भलना
ऊँगली थाम के लिखना सिखाया
लोरियाँ गा के मुझको सुलाया
जब भी हुआ मेरा मन बोझिल
तूने तान दिया अपने ममता का आँचल
जब कभी बहे मेरी आँखों से आंसू
लगा सीने से तूने ही मेरा हौसला बढाया
आज भी तू न होक भी मेरे साथ है
हूँ अंश तेरा ही
मेरी हर साँस से जुडी तेरी याद है
तेरी ही गोदी मिलेगी मुझे हर जनम में
इसका मेरे मन को विश्वास है
कानों में अब भी लोरी तेरी गूंजती है
माँ अब भी मुझे तू बहुत याद आती है
माँ