20140214

Bahut mushkil hai

Bahut mushkil hai
Saadey panney par mann mein umdtey bhavon ko ukerna
Ekk dariya
Jo behta hai bheetar mann k
Bahut mushkil hai
Uss dariya k bahaav ko
Utaar chadaav ko shabdon mein pirona
Woh jazbaat
Jo umadtey hain
Phir antar mein hi so jate hain
Kabhi kabhaar karwaten lete hain
Bahut mushkil hai
Unko jas ka tas ubhaarna kaagaz par

Kai baar
Anekon dafa
Koshishen kartey hain
Magar
Kho jaate hain shabd hi kosh se
Saari paribhashayen
Bemayne si lgti hain

Bahut mushkil hai
Bahut mushkil

कहानी

चाहता था इक कहानी लिखना
इक बेहतरीन कहानी
जिसमे संवेदना हो
सोच रहा था
पर
कुछ भी सूझ नही रहा था
कोई इक घटना
खोया था सोच में
रात के 10 बज गये
पर
कोई सिरा नही मिला

छोटी आयी
भैया,मेरा फैन नही चल रहा

अच्छा,सुबह देख लूँगा

वो चली गयी
डायरी बंद कर बेड पर लेट गया

भैया,फैन देख लो ना प्लीज

कल देखूंगा
छोटी चली गयी
सोचता रहा
नींद आ गयी

मच्छर के काटने से नींद टूटी
लाइट गुल थी
बाहर आया

चलो,छोटी का पंखा देख लूँ
उसके रूम में आते ही लाइट आ गयी

छोटी सोयी थी
उसके गाल पर दो तीन दाने थे
मच्छर काटने से

धीरे से बेड पर कुर्सी रख पंखे को देखा
इक तार टूट गया था
जोड़ दिया
फैन चलने लगा

आंख खुली
छोटी चाय लिए खड़ी है

भैया,आपने फैन कब ठीक कर दिया?

उसके चेहरे पर मच्छर काटने के निशान अब भी हैं

मृत्युदंड

एक थे अधिकारी
बहूत बड़े पोस्ट पर थे
अब जब बड़े पोस्ट पर थे तो जाहिर है सामाजिक भी होंगे ही
तो अकसर बड़ी बड़ी सभाओं से बुलावे भी आते थे
थे भी बहुत सज्जन पुरुष
सज्जन थे तब ही तो बड़े पोस्ट पर आसीन थे
एक बार किसी सभा में मृत्युदंड हटाने के उनके वक्तव्य पर सभी मंत्रमुग्ध थे
समाचारपत्रों ने भी उनकी भूरि भूरि प्रशंसा की

कुछ वक्त के बाद
उन्हें मानवाधिकार समिति ने उन्हें प्रस्सतिपत्र दिया
उस शाम पत्नी को उन्होंने सारी बात बताई
प्रस्स्तिपत्र भी दिखाया
उसे देख उनकी पत्नी रो दी
कल शाम ही तो भ्रूण परीक्षा क बाद डॉक्टर से कह के गर्भ पात कराया था उन्होंने
वो बिटिया जो उनकी पत्नी के पेट में पल रही थी
मृत्यु दंड का आदेश दिया था
एक नन्ही कली को
जो उनकी बगिया को महकाने आ रही थी।

प्रेम

प्रेम दिवस पर सोचा
कुछ लिखूं
फिर जेहन पर जोर दे सोचा
आखिर ये शब्द "प्रेम" है क्या?
माँ की ममता
प्रेम ही तो है
उसकी झिडकियां
उसकी डांट
प्रेम का ही तो रूप है

बाबु जी का गुस्सा होना
जब मैं देर से लौटता था घर
प्रेम ही तो था

छुटकी राखी के दिन जब बोलती
भैया मेरी उमर भी तुम्हें मिल जाये
और
बड़की राखी बांधते
हाथों को थाम
जीवन भर का साथ मांगती
और मै
सोचता
क्या पता
कब
शाम हो जाये