सूरज अभी डूबा है उसकी उदास लाली अब भी आस्मा पे बिखरी है
और चाँद अभी से झांक रहा है
पंछी अपने बसेरों को लौट रहे हैं और सारे लोग अपने घरो को
राह तकते देर हो गयी है उम्मीद भी नहीं दिखती अब
ऑंखें धुंधला रही हैं घर लौट चलूँ येही बेहतर है अब