कंक्रीट के जंगलात में
पौधे उगते हैं
छायाहीन
फलविहीन
बस भरमाती है
उसकी हरियाली
इन जंगलात में
अजीब हो जाते हैं
रिश्ते भी
दिल के नहीं
देह के रह जाते हैं
उल्लास
हसरतें
दबती जाती हैं
भावनाएं खोतीं जाती हैं
कंक्रीट के जंगलात में
बस
दस्तूर निभाए जाते हैं
कंक्रीट के जंगलात में