20150310

Chaadar

Chaadar jo buni thi mil k
Jarzar ho gyi hai
Alfazon k teeron se zakhmi dono k fafolon k nishaan saaf nazar aate hain

Ashqon ki garam boonden tar rakhti hain
Odhna mumkin nhi

Ghav jo pade the
Un se nikla mavaad
Khoon k chakkatye
Dhul nhi paate
Chaah k bhi

Koshish ki tumne
Bun ne ki phir se
Pr saare dhaage kmzor
Toot jaate hain

Chaadar badalne ka wqt aa gya hai

इक मक़ा

क मक़ा को घर बनाते हैं
रिश्ते
वक्त के साथ घर की दीवारों पे
कुछेक दरारें पड़ जाती हैं
पपड़ी पड़ने लगती है
दरारें बातों की
पपड़ी गलतफहमी की

रंग ओ रोगन कराते हैं
पर दरारें
क्या करें कमबख्त
दिखती ही हैं
और
वक्त के साथ अजनबी हो जाते हैं
घर मक़ा बन जाते हैं

रिश्ते फूल हैं

रिश्ते फूल हैं
कुम्हला जाते वक्त के साथ
और सूख जाते
झड के मिल जाते मिट्टी में
मिल जाये कोई जो
बन के गुलकंद मिठास भरते
पर
खुश्बू पहले वाली
और रंगत वापस नही आती