"माँ" का कोई विकल्प नहीं है
20150311
Lines by ranjana bhatia
जिन्दगी का सार सिर्फ इतना
कुछ खट्टी कुछ कडवी सी
यादों का जहन में डोलना
और फिर उन्ही यादों से
हर सांस की गिरह में उलझ कर
वजह सिर्फ जीने की ढूँढना !!
20150310
Chaadar
Chaadar jo buni thi mil k
Jarzar ho gyi hai
Alfazon k teeron se zakhmi dono k fafolon k nishaan saaf nazar aate hain
Ashqon ki garam boonden tar rakhti hain
Odhna mumkin nhi
Ghav jo pade the
Un se nikla mavaad
Khoon k chakkatye
Dhul nhi paate
Chaah k bhi
Koshish ki tumne
Bun ne ki phir se
Pr saare dhaage kmzor
Toot jaate hain
Chaadar badalne ka wqt aa gya hai
इक मक़ा
इक मक़ा को घर बनाते हैं
रिश्ते
वक्त के साथ घर की दीवारों पे
कुछेक दरारें पड़ जाती हैं
पपड़ी पड़ने लगती है
दरारें बातों की
पपड़ी गलतफहमी की
रंग ओ रोगन कराते हैं
पर दरारें
क्या करें कमबख्त
दिखती ही हैं
और
वक्त के साथ अजनबी हो जाते हैं
घर मक़ा बन जाते हैं
रिश्ते फूल हैं
रिश्ते फूल हैं
कुम्हला जाते वक्त के साथ
और सूख जाते
झड के मिल जाते मिट्टी में
मिल जाये कोई जो
बन के गुलकंद मिठास भरते
पर
खुश्बू पहले वाली
और रंगत वापस नही आती
20150308
20150304
अधूरी
अधूरी ख्वाहिशों के बीजों से पनपे
रात की काली दलदली गलियों में
पलकें खोलते हैं ख्वाब
जमीं नही मिलती उन्हें हकीकत की
ना ही सह पाते हैं ताप सच का
और गल जाते हैं बारिशों में अश्कों के
उन्ही गलियों में सिसकते हुए