20160826

अस्फुट स्वर

बोझ कितना भी हो
लेकिन कभी ऊफ तक नहीं करता
बड़ा मजबूत होता है
कन्धा बाप का साहिब
टूटता है तब
जब बिखरते हैं उसके सपने
बिलखता है अकेले में
जब कंधे चढ़े बच्चे बड़े होकर
चल देते हैं राह अपने
मगर खुश है होता
देख कर सुरभित सुमन अपने
उसको है मालूम
उसको है पता
आगे बढ़ना ही है जीवन
सो एक अँधेरी रात के अंधियारे में
करता है विदा उनको
नीर नयनों में भरे अपने

जा कर ले पुरे जो तेरी चाहत है
कांपते हाथों से आशीष देते
थरथराते लबों से फूटते हैं
अस्फुट से स्वर इतने

।। ईश् सदा सहाय।।

20160802

सुन री बावरी

सुन री बावरी
खनखनाती है ज़िन्दगी
तुझे ही बुलाती है ज़िन्दगी
न जाने कबसे तुझको
आवाज़ लगाती है ज़िन्दगी
कभी बनके सुबह की धूप
कभी शाम की परछाई बन के
तेरे ही कानों में गुनगुनाती है ज़िंदगी
क्यों है उनींदी सी तेरी सब हवाएं
क्यों है संजीदा सी तेरे पास की फिजाएं
जब के तेरी ही खातिर मुस्कुराती है ज़िन्दगी
तुझे याद न हो के न हो,ये आसमां है तेरा
तूने किया जो खुद से इक वादा है तेरा
तुझे हर बार येही याद दिलाती है ज़िन्दगी
पता है उसको भी, चोटिल है मन तेरा
संजोए थे ख्वाब,टूटे,ज़ख़्मी है दिल तेरा
पर तू ही बता मुझे पगली
यूँ ठहर जाना, ऐसा कुछ सिखाती है जिंदगी!

Words are mine but its
Voice of your life,your aim