20141230

एक नाकाम कोशिश तुझे ना सोचने की...

हर रात जग के तेरा इन्तजार करना
कभी तेरे आने की चाह में
करवटें बदलते सो जाना
कभी तेरा आना
और बस यूँ ही चले जाना
कभी तेरा मुझे हँसाना और अचानक
मेरी उदासी का सबब बन जाना
हर बार एक नयी तरकीब से
जाने अनजाने
दिल पे चोट कर जाना
हर बार तुझसे दूर जाने का सोचना
हर रात मेरे आसुओं की बारिश से नम
मेरे तकिए का मुझे तसल्ली देना
एक नए सवेरे का
तेरे बदल जाने का आस धराना
एक बार फिर तेरे लिए
वो अनजाना सा एहसास लिए आँखें खोलना
फिर से रात का...तेरे साथ का
उसी बेसबरी से इन्तजार
फिर से वही सिलसिला
तेरा आ के भी ना आना
मुझे करना नजरन्दाज
फिर से मेरा दिल दुखाना
और मेरा सिसिकियों को तकिये में छुपाये
गीली पलकों के साथ सो जाना
फिर से कोशिश करते हुए
एक नाकाम कोशिश तुझे ना सोचने की....

20141226

लम्हे

जिंदगी बनती हे लम्हों से
कुछ छोटे छोटे पल
कुछ उनसे भी छोटे लम्हे
कुछ लम्हे बसंत की आमद की तरह होते हैं
बिल्कुल नए
नई कोपलेँ
पेडो के नन्हे पत्तो की माफिक
कुछेक बारिश के पानी की तरह होती हैं
हमेशा ही नम रहती हैं
छू लो गर तो भिगो दिया करती हैं
अहसास के धागे में पिरोये ये लम्हेे

20141221

Poem by Amitabh Bachchan-tribute to 'Damini'

Maa bahut dard sah kar…
bahut dard de kar
Tujhse kuchh keh kar,
main jaa rahi hoon….

Aaj meri bidai mein jab sakhiyaan milne aayengi
Safed jode mein lipti dekh,
sisak sisak mar jayengi
Ladki hone ka khud pe fir wo afsos jatayengi…
Maa tu unse itna kah dena
Darindo ki duniya mein sambhal kar rehna

Maa, Rakhi par jab bhaiyya ki kalai suni reh jayegi
Yaad mujhe kar kar jab,
unki aankh bhar aayegi
Tilak mathe par karne ko maa,
rooh meri bhi machal jayegi
Maa tu bhaiyya ko rone na dena
Main saath hoon har pal,
unse keh dena

Maa papa bhi chhup chhup,
bahut royenge
Main kuchh na kar paya,
ye keh ke khud ko kosenge
Maa dard unhe ye hone na dena
Ilzaam koi lene na dena
Wo abhimaan hain mera,
smman hain mera
Tu unse itna keh dena…

Maa tere liye ab kya kahun
Dard ko tere,
shabdon mein kaise bandhu
Fir se jeene ka mauka kaise maangu

Maa log tujhe satayenge
Mujhe azaadi dene ka,
tujpar ilzaam lagayenge

Maa sab sah lena,
par ye na kehna‘

AGLE JANAM MOHE BITIYA NA DENA’

20141220

बस एक गलती

बेच डाला जिसने खुद को
खातिर तुम्हारे दूध के
इक औरत थी वो
बिन ब्याहे जो माँ बनी
एक ही,बस एक गलती की थी उसने

छोड़ो भी अब

छोड़ो भी अब जाने दो
इसका क्या सोग मनाना
क़े दुनिया इतनी काली है
बनो खुद आइना खुद का
आसमा तुम्हारी खातिर अब भी खाली है

उठ मेरी जान

उठ मेरी जान कि संभलना है तुझे
खुद ही खुद का खुदा बनना है तुझे
है रात ये स्याह गर
न ताक किसी और की जानिब
अपनी तकदीर को खुद से ही लिखना है तुझे

जब

खोने की खातिर कुछ है ही नही
कुछ पाने की हसरत भी नही
जीने की खातिर अब जिंदगी भी बची नही
चन्द लम्हे जो हैं झोली में उन्ही में जीना होगा
इस अधूरेपन का गरल अब तो पीना ही होगा
जब हकीकत मेरी जानेगी दुनिया सारी

20141215

Ekk kahaani

ekk kahaani yaad aati hai
hai siddhi saadi,phir bhi judaa si,
kuchh sochne par mazboor kar jaati hai

thi ekk gudia
thi ekk bitia
hoti to har ghar mein hi hai
to
ekk ghar mein thi ekk gudia si bitia
papa the
kahin kaam karte the
der se aksar ghar laut te the

ekk baar ki baat hai
jab papa laute,jagi thi bitia
muskuraati unki taraf badhi bitia

"papa,aap kitna kamaate ho ekk ghantey mein?"
puchha bitia ne

"tumhen kya krna hai jaan k"
uttar mila,thoda jhunjhlaye swar mein

"btao na,papa"

"lagbhag 100 rupye"
jwaab mila

"mujhe 50 rupaye chaahiye the,papa"

ukhdi si aawaaz aayi
"kisliye,phir dekha hoga koi khilauna,koi khilona nhi,
chalo,jaao,so jao"
kroddh tha vaani mein

gudia chupchaap apney kamre mein aa gyi

phir kuchh samayy baad jab pita kuchh sthir hua
mann mein uske woh prashan vicharne lga
apney par hi sharminda hone lga

khola pat bitia k kamre ka
aawaaz di

"bitia,so gyi kya?"

"nhi papa"

pita ne use 50 rupye diye,aur

tabhi
gudia ne apney takiye k neeche se kuchh nikala

gina

"papa,yeh lo aap,poorey 100 rupye,mujhe kal aapka ekk ganta chaahiye,zra jaldi aana"

ekk muskuraahat ke saath bitia boli.

Untitled

चलते हैं हम जितना
पैरों के छूट गए निशान मिटाते नहीं जाते
हर माँ अपने बच्चे के पास पहुँचे सकुशल...

20141209

Chal

Chanda ko boll bnayen
Retii pe saagar ki ludhkayen
Suraj ko samandar mein kheenchen
Aur khoob nehlayen
Asmaa ki jhaadi se chal pake sitaare tod k laayen
Iss saada saada se sky ko chal rainbow se mehkaayen

Suraj ko lgta hai ho gyi hai sardi
Usko doctor k ghar le jaa ke injection lgwaayen
Chanda gume saari raat baahar ko
Chal uski amaa se uski chugli khaayen

Chal kuchh naya plan bnayen

20141207

Madhur swpan

Suraj gya jo dhal..
to raat h aayi..
sang woh khoobsurat..
jhilmilaate satrangi sapney bhi laayi..

sapney jo hain meethe meethe..
khushnumaa..
pukaartey hain tumko..

kahaan ho gumshuda se..
kyun ho khoye khoye..
chhoro na fikar..
chalo ab palkon ko mundo..
aur tham lo..
koi bhi dor sapnon ki......

Akashi canvas

Gyi raat jb main rang bhara rha tha aakashi canvas mein
Neend k jhonkon ne mujhe bistar ki taraf dhakel diya
Bhor huyi to dekha
Color plate thithur rahi thi
Usme rakhe rang yoon chhitrey pde the
Jaise sapnon ki chhilan
Aur maine unki raakh ko nalka khol bha diya

Aaj phir asmaa k canvas mein safedi jiyada hai
Thand badhne lgi hai

Chaand

Bhari hai dunia rishton se
Rishtey swaarth k
Rishtey matlab k

Ekk kali milii thi mann ko
Ekk sapna bunaa tha mann ne
Asmaa khaali hai
Chidii ne seekh liya udnaa

Kaanch dhundhlaa raha hai
Sapney dhuaan ho rahe hain
Sulag rahe hain taarey asmaa mein
Chaand siyaah hua jaata hai

20141204

Chup nhi reh paata kya

Chup nhi reh paata kya yeh
Hr wqt na jaane kahaan
Na maloom kidhar
Bhatkta phirta hai
Kabhi khala ki kisi kotar mein milta hai
Unghta hua
Kabhi saagar ki reti mein beshabab chahalkadmi karta dikh jaata hai
Kabhi pahadi janglaat mein unsuni si awaazen dhundhta nazar aata hai
Chup nhi reh sakta hai kya yeh
Sda hi safar mein hota hai
Mann
Yeh mann

Thoda sa aur

Aangan mein andhera tha chhaya
Ghana tha itna k sujhta na tha kuchh bhi
Yoon lgta tha jaise roshni bhool hi gyi hai raah idhar ki
Asmaa bhi tha khaali khaali
Usi wqt dikhi lakeer ekk roshni ki
Woh taara bhor ka timtima raha tha asmaa mein
Nya din aane mein thoda sa aur wqt reh gya tha

20141201

Kbhi kbhi kho bhi jati hain

Kbhi kbhi kho bhi jati hain mayen
Duniyavi badlon mein
Aur dur nikal jati hain
Dur bahut dur
Itni dur k barson baad bhi nhi milti

Us din jb woh ro raha tha
Rote huye pukaar raha tha
Bhagwaan ko
Jo saamne hi khada tha
Muskura rha tha
Aur usi k saamne
Woh nar bhediye bhambhod rahe the
Ekk naari deh ko jo maa thi uski
Jiska eklauta asmaa tha woh
Aur phir
Jhadi k kinaare aankhen kholi usne
Kuchh bhi na tha
Bs tha woh jise param pita kehte hain sabhi
Woh naari
Naari deh kho gyi thi

20141130

क्या कभी मैंने ये कहा

मासूम

"अम्मा,क्यूँ बिला वजह कोशिश कर रहीं है,आप,गुडिया..बहुत है मेरे लिए"
उसने माँ को ग्लास में पानी देते हुए कहा

माँ मुस्कुराते हुए बोली
"मै तेरे वास्ते लडकी नही देख रही,गुडिया की खातिर माँ ढुढ रही हूँ,इक अच्छी माँ"

"फिर तो मुश्किल है,कोई औरत दुसरे के बच्चे की खातिर बेहतर माँ होने का दावा नही कर सकती"
हँसते हुए उसने सोफे का कवर सही किया

क्या कहती माँ कि उनके अंदर इक गांठ बंधी है
सो चुप लगा गयी

रात खाने के टेबल पे दोनों बैठे थे
रोटी का इक निवाला उसने माँ की तरफ बढाया

माँ ने बेटे की आँखों में लरजती प्यार की खुशबु देखी और उनका मुंह खुल गया

"माँ,किसलिए?,ज़रूरत क्यूँ है,आप हैं ना,आप से बेहतर गार्जियन होगी क्या कोई मेरी बिटिया के लिए"

"ज़रूरत है,उसे सख्त ज़रूरत है इक माँ की
आज फिर फोन आया था कि गुडिया स्कूल वैन से नही आने की जिद कर रही है,वो कहती है कि दादी को बुलाएँ,मुझे अपने कॉलेज की मीटिंग कैंसिल कर उसे लेने जाना पड़ा,उसकी इक रट थी,मुझे वैन में नही जाना,किसी तरह उसका रोना बंद कराया,वन ड्राईवर जा चूका था वरना मई उस से पूछती आखिर हर दुसरे तीसरे दिन वो वन से ना आने की जिद क्यूँ करती है?"

"क्या माँ,आप भी ना,गुडिया कौन सी बड़ी है,5 साल की ही तो है,बस आ गयी होगी जिद में,या कोई बच्चा परेशान करता हो उसे वैन में,मै बात कर लूँगा ड्राईवर से"उसने मुस्कुराते हुए माँ के कंधे पे हाथ रखा

_____________________________________

शाम का वक्त हुआ था,उसके कदमों में तेज़ी थी,वो अपने स्कूल से जहाँ वो डबल शिफ्ट में पढ़ाती थी घर लौट रही थी

सड़क के तारकोल की तपिश पैरों को झुलसा रही थी
अचानक उसके आँखों के सामने से एक मंज़र गुज़रा

एक मकान के बाहर के चबूतरे पर एक छोटी लगभग 5 साल की बच्ची बैठी थी,उसके पास एक आदमी बैठा था जो बच्ची के खुले बाजू पे हाथ फेर रहा था,हाथ की उँगलियाँ कंधे से उँगलियों तक आती,फिर जाती,फिर आती,दुसरे हाथ ने बच्ची को घेरा था,घेरा कभी तंग होता,कभी बढ़ जाता

वो बाज़ की तरह झपटी और बच्ची को उस आदमी से अलग कर दिया

"कौन हो तुम?इस बच्ची से तुम्हारा क्या रिश्ता है?"उसका तपतापाया चेहरा देख उस आदमी के रोंगटे खड़े हो गये

"मैं....मैं...."उस आदमी का हलक सूख गया जैसे

लडकी ने बच्ची से पूछा,"बिटिया,ये कौन हैं?"

"अंकल,पापा के दोस्त"बच्ची ने जवाब दिया

"पापा किधर हैं?"

"पापा तो अपना फोन लेने अंदर गये हैं"

"चलो मेरे साथ"उसने बच्ची का बाजू थामा और अधखुले दरवाजे में दाखिल हो गयी

अंदर से अमन आता दिखा

"जी,आप कौन?"
अमन ने इक अजनबी लड़की को देख पूछा

"बाहर गली में कोई बच्चा नही,फिर भी आपने इस बच्ची को बाहर भेज दिया,संभालें इसे"लडकी का लहजा सख्त था

"वेट..वेट..मिस,आपको कोई गलतफहमी हुई है"
"गुडिया,आप तो अंकल के साथ थी ना"
अमन गुडिया से पूछने लगा

"जी पापा"

"लुटेरे को रहबर बना के आये थे आप,हर हाथ मिलाने वाला दोस्त नही होता,समझे आप?"
लडकी का सारा लहू जैसे चेहरे पे छा गया था
वो जाने के खातिर मुड़ी और
मेज पे रखी तस्वीर पे नज़र पड़ते ही बेसाख्ता उसके जबान से निकला,"मिस जाह्नवी...."

30 साल की लड़की के भीतर से 11 बरस की बच्ची निकल के खड़ी हो गयी
सूखते होंठों पे ज़बा फेरी और दरवाजे से बाहर हो गयी

अमन हैरान था परेशान भी,सन्नाटे में था,ये क्या कह गयी वो अनजान लडकी,मेरा दोस्त,गुडिया के साथ......
उसके भीतर इतनी भी हिम्मत ना थी के वो बाहर जा के अनिल को डांटता,सवाल जवाब करता,वो सकते में था.....

वाणी एक दफा फिर ठिठकी
जिन टीचर की तस्वीर वो अभी भीतर देख के आयी थी,उसके सामने कुछ शॉपर के साथ खड़ी थी
वो उन्हें कभी भूल नही सकती थी
उसके पास खुशगवार खज़ाना नही था यादों का
बस कुछ इक यादें थीं

"आप....आप मिस जाह्नवी हैं ना"उसकी जबान लडखडाई थी,और आँखें डबडबा उठी

"तुम कौन हो बेटा?पहचान नही पाई"शॉपर वाली औरत ने प्यार से पूछा

लडकी 30 के आस पास थी,पर चेहरे पे अब भी मासूमियत बरकरार थी

"मुझे अक्सर भूल जाते हैं लोग,मैं वाणी सिन्हा,अच्छा है कि आप भूल गयी मुझे,जिनके दिमाग में खलल हो कोई नही याद रखता उन्हें"
वो तेज़ क़दमों के साथ बाहर निकल गयी
जाह्नवी के भीतर की गांठ फिर चुभने लगी थी

_____________________________________

तेज़ कदमों से चलते हुए वो घर पंहुची
दरवाज़ा खुलते ही अन्दर,और जा कर लेट गयी

"क्या हुआ?फिर किसी से झगडा कर के आई हो?"उसकी माँ ने पूछा

"नही,मैंने कोई झगडा नही किया,बस आते हुए एक शख्स को एक बच्ची के साथ गलत करते देखा और चुप ना रह सकी"

"वाणी,उम्र गुजर गयी पर ये क्या भर रखा है तूने,तेरे भाई बहन तुझसे मिलना नही चाहते,सारे तुझे सनकी पागल समझते हैं,कोई रिश्ता नही आता तेरी खातिर,और तू ...कोई फिकर नही,बस खुदाई फौजदार बनी फिरती है"
उसकी आँखों से पानी के दो नमकीन कतरे निकले,गालों से होते तकिये में समां गये,वो खुले दरवाजे को तकती रही,पानी का सैलाब बहता रहा
_______________________________

"अजीब पागल लडकी थी,आंधी के जैसे आई और बेकार की सुना के चली गयी"अमन अब तक परेशान था,माँ ने गुडिया पे नजर डाली  और अमन से पूछा
"वाणी क्यों आई थी?क्या कहा उसने?"

"आप जानती हैं उसे!!!"

"मेरे सवाल का ये जवाब नही अमन,मुझे उलझन हो रही है,बोलो"

"वो कह रही थी के अनिल गुडिया के साथ मिसबिहाव कर रहा था"और सब बताता चला गया

माँ के भीतर की गांठ और ज्यादा तेज़ी से चुभने लगी थी

रात बीत रही थी उनकी आँखों से नींद गायब
हाथ में एक पन्ना था जिसकी स्याही कई जगह से फ़ैल सी गयी थी,कुछ इक लफ्ज़ मिट से गये थे पर उन्हें एक एक लाइन याद थी

ये पन्ना फिफ्थ की वाणी नाम की एक बच्ची ने लिखा था मदर डे पर

आज उन्हें वाणी और गुडिया एक नजर आ रहे थे और गुडिया की टीचर की कही बात याद आ रही थी
"जाह्नवी जी,मेरे ख्याल से गुडिया को वैन ड्राईवर पसंद नही,जिस तरह आप उसे सुबह स्कूल छोडती हैं पिक भी कर लें या कोई और....."आवाज़ में झिझक थी,"आप खुद सोचे सारा दिन स्कूल में अच्छे से रहने वाली बच्ची वैन के पास जाते ही क्यूँ रोने लगती है...आप समझ रही हैं ना"
जाह्नवी तो जैसे जम गयी थीं,उनकी पोती किस हालात से गुजरती है वो महसूस ही न कर सकी और किया किसने जो बरसो पहले उनकी स्टूडेंट थी वाणी

वो सबसे छोटी थी
सो घर के अनगिनत काम थे जो उसके जिम्मे थे,कुछ भी घटे उसे लाना होता था पास की दुकान से जहाँ वो जाना नही चाहती,ऊपर का हिस्सा किराये पे था वहाँ जो अंकल थे उनका खाना ले जाते वक्त उसके कदम थरथराते थे वो नही जाना चाहती थी सीढियों से ऊपर,बड़े भाई के दोस्त से बड़ा डरती थी,वो उसके गाल खींचते और......
उसे स्कूल का वक्त अच्छा लगता था और सबसे प्यारी थी मिस जाह्नवी और फिर पसंद था स्टोर रूम जहाँ उसकी गुड़ियाँ थी
हर रात वो प्रे करती भाई के दोस्त न आए,ऊपर वाले अंकल दूर चले जाये,और वो परचून वाला बीमार हो जाये हमेशा के लिए

____________________________________

अमन के हाथ में एक पन्ना था
लिखा था
"मेरी माँ
मै क्या लिखू मेरी माँ तो है पर वो मेरी बात समझ नही पाती
मिस जाह्नवी कहती है कि गॉड 100 माँ से ज्यादा प्यार करता है पर कैसे मान लूँ जब मेरी माँ मुझे समझ नही पाती
मैं नुक्कड़ की दुकान पे नही जाना चाहती क्यूंकि वो मुझे दुकान के अन्दर ले जाते हैं
मैं ऊपर के किरायेदार अंकल को खाना देने नही जाना चाहती वो बहुत गंदे हैं मुझे हर जगह हाथ लगाते हैं
मैं भाई के दोस्त के पास भी नही जाना चाहती वो बहाने से मेरे गाल खींचते हैं मुझे जबरन गोद में बिठाते हैं
मैं माँ को कैसे समझाऊ,मैं रोती हूँ तो वो मुझे मनहूस कहती है
मैं किस तरह माँ को बताऊ
डिअर गॉड,आज हैप्पी मदर डे पर मेरी दुआ सुन
प्लीज् प्लीज प्लीज्
ओ गॉड प्लीज्"

अमन की ऑंखें भीगी हुई थी
माँ ने बताया कि ये वाणी ने लिखा था जब वो 11 बरस की थी
और इसी कारन वो ही समझ सकी,देख सकी जो हम नही देख सके
मैंने उसके माँ बाप को बुला कर समझाया था कि उसकी मासूमियत बचाएं
पर बात समझ ना आई उनके और वो लोग उसे स्कूल से निकाल ले गये

20141126

From the memories

Dekha to hoga
Kai dafa
Mehsoos bhi kiya hoga

Maine kiya
Raat jb akash khali tha
Ikke dukke taare undh rahe the
Yda kada jaag pdte
To unki timtimahat badh jaati

Do bj rhe the us wqt
Achank
Zehan mein kuchh halchal suni
Dekha
Zehan mein rakhi diary k panney fadfadaa rhe the

Woh ruke
Us panney pe
Jahaan tumhaara saath paaya tha maine

Un dinon bda bad dimaag hota tha main
Yoon to aaj bhi main waisa hi hoon

Rishton ki kadiyaan jodte huye toot rha tha
Shaayad wqt wzha tha us tootan ki

Suna hai k har shay ki ek tayshuda umr hoti hai
Parivartan hote rehte hain
Tab hi to darya-e-zindgi tarotaaza milti hai
Hm bhi bdlte rehte hain
Umar k saath saath
Aur soch bhi

Khair jo bhi ho

Tum bhi pareshaa the
Naakhush the
Tumhaare daayre mein
Jismen tum rehte the
Hwa zehrili ho gyi thi
Ghutan hoti thi

Manzar idhar bhi kuchh zuda na tha

Tumne haath thaama
Maine apna sir tumhare kandhey pe rakha
Zar zar roya

Phir dono saath nikal pde
Kuchh socha na tha
Na naam hi diya tha

Raaton k akelepan mein tum saath rhe
Kbhi khaana khilaya apne haathon se kaur bna bna k
Saath mein anekon dafa hm aadhi raat ko beach pe ghume
Mera har israar tum maan liya karte
Mna nhi kiya kabhi tumne
Aur main
Bde hi pyaar se di thi woh sunahri ghadi tumne
Kho di maine

Aksar tum par gussa ho jaata
Aur tum bas mera haath thaam kar sunti
Aur mere chup hone par kehte
Ho gya khatam
Isi tarha ki ekk subha main udel rha tha apna garal
Us din tumhara janamdin tha
Phir tum duje pal tum na jaane kahaan kho gye

Maine ek dost paaya tha
Kho diya

Masauda

Jhado
Gard yaadon ki
Yaaden
Jo basti hain jehan mein
Kuchh ekk dill k kareeb milti hain
Phir inhi yaadon ko chaadar bna k odho
Aur uski risti gandh ko mehsooso
Ekk kahaani janmegi
Chand alfazon se ekk khaaka khincho
Aur
Aarzoo ko lifafey se nikaal k
Taanko
Ekk masauda taiyaar karo

Jhaad daalo gard yaadon ki

20141122

Aaj kal

Mehsoos krta hoon tumhen
Antar mein
Naa jaane kyun
Haan
Pta hai mujhe achhi trha
Tum nhi likhi mere haathon ki lakeeron mein
Phir bhi
Yeh mann
Mehsoos krta hai
Tumhen
Tumhaari kilkaariyon ko
Mann k bheetar k patal par
Tumhen chalte,sambhlte dekhta hoon
Pehle is patal pe main bhi hota tha sang tumhaare
Magar iin dinon
Tumhen bas tumhen hi dekhta hoon
Apney aas paas k maahaul se jujhte
Apna raasta khud bnaate
Kabhi thaki thaki si lgti ho
Us wqt jab tumhen dhandhas badhaane k waaste haath badhaata hoon
Ojhal ho jaati ho
Na jaane kidhar
Mann mein aksar yeh hota hai

Ummiden aur aansu

Aansu
Ummiden
Bada gehra rishtaa hai donon mein
Ummiden hi kaaran hain aansuon k
Palkon k giile hone ki wazhaa hain ummiden
Ummidon k beez panapte hain rishton ki mitti mein
Aur konpal foot te hain
Phir yunhi
Anaayaas hi
Bewazhaa ya kisi wazhaa k kaaran
Toot jaati hain ummiden
Jhadne lgte hain pattey
Aur
Aansu ki wazhaa bnte hain

20141111

O ri zindgii

O ri zindgi
sun ri zindgii
bta zara
tera ghar kidhar
tera dar kahaan
tere sang rehta kaun kaun hai
o ri zindgii
bta zara
tujhse milna chaahe koi jo
to kis trha mile
de tu apna pta
apna thaur bta
hai kaun si gali mein tera makaa
o ri zindgii
sun ri zindgii
bta zara
Tera ghar kidhar
Tera dar kahaan..........

20141026

Saath hi hai


Saath hi hai khuda tere,
O re bandey
Kyon bechain hai rooh teri

Bas ekk baar

Zindgi to saheli k jaisi hai
Meri gudia
Bas ekk dafa
hans k gale mil le us se

20141022

Raam aane waale hain kyaa

Lautey raam ayodhyaa ko jab
The roshan janpad k path o aagaar

Awadh ki sadaken
Aaj phir roshan hain

Raam aane waale hain kyaaaa?

Diwaali

diwaali
raat amavas ki
shahar saja roshni se
mann ko jo roshan kare
ekk aisa deep jala bandey

20141011

Few lines on pari's birthday

Umang se bhare hon
Din tumhaarey
Sukoon bhari hon
Neenden

Har waqt,har jagha
Sachhey saathi hon
Ho poori har chaahat
Poori hon saari ummiden

Chamkta hai jaise suraj gagan mein
Dharti par tum chamko
Ho abhi chhoti kali k jaisi
Phool ban kar jahaan mein mehko

Hai mauka tumhaarey janamdin ka
Hai mgar mere haath khaali
Nahi koi guldasta
Na koi hai tohfa
Bas diye sang hai pooja ki thaali

Khul k jeeyo
Aur khilkhilao
Hai aashish
Jag mein naam kamao

20141008

mere shabd

Lado
Do akshar
Beti har pita ki laadli hoti hai,aur fakhr bhi
Jo bin maange khushi bikherti hai
Saare ghar aangan mein
Apni totli jabaan se jab woh pita ko pukarti hai
Us waqt yun lgta hai
Jaise ek nirjhar behne lge
Jaise k saptsur kaan k parde par gire hon
shahad ki dali si meethi
Resham se bhi komal
Mere jeevan mein bhi hai aisi khushi
Yun to is safar ki shuruaat mere mann k kisi kone se huyi
aur shaayad hoti bhi hai,rishton ki shuruaat,kisi andhere kone se hi,jahaan bin paani,hawa,khaad k ek beej apni konpal kholta hai,rishtey ka beej,
phir us paudhey ko bda karne ki khaatir pyaar ka jal,sneh ki dhoop dena hoti hai,
par yahaan ulat tha,nanhe paudey ne krishkaay sharir waale maali ko jiski aankhen thakne lgi thi,aur aasmaa gehra hone lga tha,ko sambhaala,saheja,nav urzaa di,
maali nishabd sa tukoor tukoor takta raha,aur paudhaa is maali ki jis se uska koi rishtaa na tha,gar kuchh tha to ekk neh, bas usi rishtey ki dor thaame woh badhte rahe
kayi ekk dafa maali k bojh se komal paudha dagmagaya,kahi dafa maali ki chhaya ne suraj ki dhoop ko rokne ki koshish ki,par paudhey ne khud ko sthir karte huye,us maali ko bhi jeevan diya

Lado ka mann padhne ki ek naakaam koshish

O mere apney
Sanjoye the tumne
Meri khaatir kuchh sapney
Thaama tha mujhko
Saheja tha mujhko
Yeh yaad
Godi mein le ke sunaayi thi lori
Bahut maante they
Bahut chaahte they
Kya kar diya maine
Jo bna li yoon doori
Bahut jakham khaye rishton se
Naaton ne nocha,kharocha
Mila jaise mujhko sang tumhara
Maine bhi to bas ek ko diya bas sahaara
Ek yehi tha na tumahari nazar mein gunaah mera
Ek pal na socha
Na hi bichara
Tumare bina hai kaun mera sahara
Kaise hoga tum bin tumhari lado ka gujaara
Phir main wahin raah ki dhool mein houngi
Mere janak bin tumhare
Kya reh jayega astitav mera
Yeh lines likhi thi 16 january 2013 ko,
Ek soch aayi thi,tumhaare aur mere beech k un 9 dinon ki baat cheet padh kar,
Ekk naakaam si koshish ki thi,lado ban ne ki,tumare mann ko shabdon mein utaarne ki

happy birthday to you

छूटे ना दामन कभी उम्मीद का
ये हौसला ना कभी मान्द पड़े
है जो अभी धुंधला सा आसमां
सूरज आज का उसको रोशन करे
आरजू के परिंदे जो ख्वाबों में बसते हैं
जीवन आसमा में कुलांचे भरें
नब्ज़ की तरहा धडकता वक्त जो बेलगाम चलता है
वो वक्त तुम्हारे ही इशारों पे चले
चराग चाँद का यूँही करे रोशन तुम्हारी रूह को
टीस देती यादों को जगमग सितारे भरें
पायी है सदा ही इक मुस्कान जब भी देखा है तुम्हे
मुस्कान की ये बरखा सदा ही बरसा करे
जुड़ते रहें खुशियों के मौसम जीवन बगिया में
इन्द्रधनुष के रंगों से तेरा जीवन सराबोर रहे
ये बरस तुम्हारे हर ख्वाब को पूरा करे

on di's birthday

रेनबो के रंग सजावें
आने वाले कल को
स्टार्स आँखों में भर जाएँ
चमका दें हर पल को
सूरज देवे रंग सुनहरा
चाँद आवे आँगन को
सपनीली अखियों में
पलते हैं कुछ नन्हे ख्वाब
सच हो जावे वो सारे
महका दे जीवन को

HAPPY BIRTHDAY

khushiyon ki potli liye

Khada hai aaj

Kholo apney pankh

Utar fenko saari chintaayen

Aur udaan bharo

Naye kshitiz ki or

Happy birthday pari

khusi

bina wazhaa dukhon ko dete ho kyon nyotaa.
khushi baahen pasaare tumko bulaati h udhar jao

pyaar

pyaar sachcha pyaar umr k is padav pr pahunch kr mudd k peechhe jb dekhta hoon... hansii aati h... pyaar kabhii mujhko bhi lagtaa thaa hota h hr ekk ko woh umr hi aisii hoti h... sapney achchey lgty h hwa me udty h hr pall burii lgtii hy apnon ki baaten... woh ekk achchha lgtaa h uskaa hr shabd chhutaa h bhaata h mann ko pr kyaa hotaa h baad mein kahaan kho jate hain.. dhuwaan bankrr bikhr jaate hain.. saare sapne ekk.ekk kr tut.tey jaate h kahaan kho jaata h woh jo hwaaon mein lekr jaata thaa door baadlon k uss paar tak.. kbhi kabhi to chaand tak prwaaz hua krti thii... jamii pr aa jaata h woh parindaa kate huye paron k saath... pyaar sachcha pyaar... aaj yoon lgtaa h woh to bs ekk khel h... do khiladiyon k beech jo shuru hota h ankhon se... aur khatm hota h jism pr jakrr... pyaar ka khel jarurt jism kii chaah jism kii schcha pyaar

woh

woh ekk sadasurat sanzeeda ladki
sard mausam aur sabj chehraa,
peshanii parr halkaa pasinaa,
bandd kamraa beete majii mein bhatkatii woh besukoonn ladkii,
sochaa kartii hai na jane haqiqatt hamesha talkhh kyunn hoti hai,
woh filmon,kahaniyon mein bhi to ladkiyan hain jinko isq ke sivaa koi kaam nhii,
yahaan to jindgii mein do ghadi ka bhi sukoon nhii,
sochaa karti hai yehii woh nekksiratt ladkii
koshishen tamaam kartii hai,
subahh se shaam kartii hai murjhaye phoolon ko hasaane ki apnii koshish woh,
dekha kartaa hoon aksarr usko,
merii raah se hokarr rozaana hi gujraa kartii hai woh dill ki khubsuratt sadaasurat ladkii

shaayad

tumharii tanhaii ka,
tumhari baaton ka,
koi jawaab nahin hai mere paas,

main to bass apnii tanhaii mitane tumhare paas aaya thaa,
sochaa thaa tumse baaten karke mitt jaaye merii tanhaii shaayad,

milaa jo tumse to tumko bhii khudd saa hii paaya,

abb bhataktaa hoon aawaara saa
kisii aur kii talaash mein,

koi to mile raah-e-zindagii mein

kahin,kisii ke paas to jawaab hogaa
 merii tanhaii kaa shaayad.

kaash

unn ankhon ko jabb bhii dekhaa hai,
nazarr aayi hai sirff udaasi keval gamm
,meraa dill chahta hai k unn ankhon mein ho khushi
zindagii machalti dikhe,

ekk lamhe ko bhii gar aisa ho jaye,
 main bhar sakun unmen ujale
roshaniyan,uss ekk lamhe ki khatir
main de sakta hoon apna jeevan tamaam,

armaa hai meri zindagii ka ekk,
dekhoon unn ankhon ko hanste muskurate,

kyaa poora hoga mera ye armaa?

kyuki suna hai maine logon se
k socha huaa kabhii poora nahin hota
,parr kashh aisaa ho
 yehh dill chahta hai...

sansaar

dekh kar iss sansaar ko jee chahta hai lagaun main thahakaa
jahaan bhi dekhta hoon wahin nazar aati hai berang duniyaa,
sabhii chale jaa rahen
naa jaane kidhar
ankhen band kiye andhon ki tarha,
dekh kar yeh manzar sochta hoon
 anndhe inn ankh walon se hai behtar,
sabhii badhe ja rahe hain hodd mein
aur duniya
woh to meri tarha tamashbeen hai
dekhti hai sab,
aur badd jaati hai apne kaam par..

yaa

jindagii haii ya koii toota hua ainaa,
jismen khudd ke chehare adhoore se dikhaa karte hain,
yaa hai taptii huyii retilii zamii
jiss parr chalte hain ashqoon se bheege dill
parr jiskii pyaas bujhtii nahin hai,
yaa hai koi ghataa
jo khoon ki baarishh kartii hai,
yaa hai koi dulhan
jiskii mehndii ke liye jigar ke lahoo kii jarooratt hotii hai,
yaa hai

muskaan

main vaar doon apni zindgi bhi tere sadkey...
bs muntzir hoon teri usi muskaan ka

mukhautey

yeh zindgii tuu hii rooth jaaye to ho behtrr,
chehrey pr mukhautey lgaana hmen nhi aata...
ghamm hai agar to kaisey kahen k khushii hai yeh,
syaah ko doodh kehnaa hamen nhi aata...
baazaar h yeh duniyaa jahaan sb biktaa h,
ekk hm hain k khudd ki bolii lgaane hmen nhi aata...
baras rhe hain aansun uskii aankhon se ptaa hai hmen,
parr kyaa kren mann sachchey rishton mein jhooth milaana hmen nhi aata....

aziz

bna dala zeenat logo ki jabaano ki,
jo shakhs mera aziz tha kbi...

lado